BIOELECTRICITY WITHIN HUMAN BEING"
Bioelectricity refers to electrical currents occurring within or produced by the human body. Bioelectric currents are generated by a number of different biological processes, and are used by cells to conduct impulses along nerve fibres, to regulate tissue and organ functions, and to govern metabolism.
मनुष्य शरीर की विद्युतधारा
बायोइलेक्ट्रिसिटी का तात्पर्य मानव शरीर द्वारा उत्पन्न या उत्पन्न होने वाली विद्युत धाराओं से है। बायोइलेक्ट्रिक धाराओं को कई विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं द्वारा उत्पन्न किया जाता है, और कोशिकाओं द्वारा तंत्रिका तंतुओं के साथ आवेगों का संचालन करने के लिए, ऊतक और अंग कार्यों को विनियमित करने के लिए, और चयापचय को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
मानव शरीर अग्नि, वायु, अंतरिक्ष, पृथ्वी और जल से बना है। इन पांच तत्वों का सामंजस्य में रहना हमारे भीतर की चलायमान विद्युतधारा पर निर्भर करता है और पश्चिम देसों में इसे 'बायोएलेक्ट्रिकसिटी' कहा जाता है। इसका मुख्य बटन "आज्ञाचक्र" नामक हमारी भौहों के बीच में स्थित है। इसे ज्ञानचक्र भी कहा जाता है। यह पीनियल ग्रंथि से मेल खाती है। यह मानसिक और आध्यात्मिक आयाम के बीच का सेतु है। यह हमारे भीतर की टेलीपैथी को जागृत करताहै। इसके जागृत होने के कारण विचार संचरण को भेजना और प्राप्त करना संभव है। आज्ञा चक्र पर ध्यान केंद्रित करने के लिए, दोनों भोऑ के बीच के बिंदु का उपयोग किया जाता है। जहां प्रकाश किरण, कमल पंखुड़ी या "ओम्" रूपी प्रतीक की कल्पना की जाती है। यह चेतना या विद्युत् मानव शरीर में चौबीस घंटे बहती रहती है। उचित अविरल प्रवाह स्वस्थ शरीर, मन या संपूर्ण स्वस्थता की द्योतक मानी जाती है। यदि किसी भी कारणवश इस विद्युत् प्रवाह में अवरोध उत्पन्न हो जाए तो उससे संबंधित बिंदु विशेष में दर्द के साथ रोग की उत्पत्ति हो जाती है। इस विद्युत प्रवाह का दूसरा स्विच या बटन हमारे हाथों और तलवों में स्थित होता है। हाथों या तलवों को अगर दबाया जाए तो रुकी हुई विद्युत् धारा फिर से अपनी लय में बहने लगती है। वहां जमा हुआ टॉक्सिन या कार्बन डाय ऑक्साइड अपनी जगह छौड़ देता है और दो - एक मिनट के दबाव से दर्द गायब होने लगता है। अब इन बीमारियों के कारणों के बारे में हमारे मन में कई सवाल उठ खड़े होते हैं कि गलत खान-पान, बदलती जलवायु, अनजान जीवन शैली, तनाव, हताशा, अधिक काम, गलत विचार ; आखिर बिमार होने का कारण क्या है? कारण जो भी हो पर प्रकृति के नियम विरूद्ध जीवनशैली जरूर रही होगी जिसे सुधारने की जरूरत है।

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